वस्तु एवं सेवा कर का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: एक विश्लेषण

 

मोनिका सतनामी

अतिथि विद्वान (वाणिज्य) शा. कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सतना (.प्र.)

ब्वततमेचवदकपदह ।नजीवत म्.उंपसरू रण्ंसंउ1981/हउंपसण्बवउ

 

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भारत के कर ढ़ाँचे में सुधार का एक बहुत बड़ा कदम हैं ळैज् अर्थात ळववक ंदक  ेमतअपबम ज्ंग(वस्तु एवं सेवाकर) ळैज् लागू होने से पूरा देश एकीकृत बाजार में तब्दील हो जाएगा। इस नवीन कर प्रणाली मंे सभी प्रकार के करो को समहित किया गया हैं। जैसें-उत्पाद शुल्क, सेवाकर, मनोरंजन कर, ट।ज् आदि। अब पूरे भारत में सिर्फ एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर लागू होगा। यह नवीन कर प्रणाली बहुप्रचारित एवं बहु प्रतिक्षित वस्तु एवं सेवा कर कानून 1 जुलाई 2017 से लागू हो गया है इसका सीधा सम्बन्ध अब तक लगने वाले दूसरे तरह के कर जैसे सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क, सेवा कर, प्रवेश शुल्क, मनोरंजन कर, वैट सब इसी में शामिल होगें। आजादी के बाद इसे देश का सबसे बड़ा कर सुधार कहा जा सकता है, हांलाकि व्यापक रूप से इसका क्या लाभ होगा यह तय कर पाना मुश्किल है। वस्तु एवं सेवा कर को लेकर व्यापारी एवं आम उपभोक्ता में असंतोष की स्थिति व्याप्त है। एक देश एक ही कर लागू हो रहा है, 3 अगस्त 2016 को देश भर में वस्तु एवं सेवा कर पारित किया गया है, वस्तु और सेवा कर जिसे सरकार ने इसे 1 जुलाई 2017 से लागू करने का निर्णय लिया है। देश के कर ढांचे के आजादी के बाद यह सबसे बड़ा बदलाव है जिससे आम आदमी को फायदा होगा या बिल राज्य सभा द्वारा पारित किया गया जिसे लोकसभा द्वारा मई 2015 में पारित किया जा चुका है। वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत जून 2016 में नेशनल वैल्यू ऐडेड टैक्स लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया है।

 

ज्ञम्ल्ॅव्त्क्ैरू  वस्तु एवं सेवा कर, आगत कर प्रणाली, अप्रत्यक्ष कर।

 

 

 

 

 

 

 

प्रस्तावनाः-

वस्तु एवं सेवा कर एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर है जो व्यापक रूप से देश के निर्माता व्यापारी और वस्तुओं एवं सेवाओं के उपभोक्ता पर लगाया गया है। यह टैक्स अन्य टैक्स को हटा कर वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीदी एवं विक्री के प्रत्येक स्तर पर लगने वाले इस कर में ‘‘आगत कर प्रणाली’’ शामिल होगा इस प्रणाली के अन्तर्गत वस्तु एवं सेवा कर वस्तुत के अधीन पंजीकृत व्यावसायों को ‘‘टैक्स क्रेडिट क्लेम करने की सुविधा’’ मिलेगी। वस्तु एवं सेवा कर भारत में अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में बदलाव का एक बहुत बड़ा कदम है, भारत में वस्तु एवं सेवा कर के लागू होने पर यह कुछ समय के लिए शून्य दर के साथ अथवा बहुत कम दर के साथ लगाया गया है।

 

वस्तु एवं सेवा कर सम्बन्धी बिल है, जो देशवासियों पर लगाया गया है अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस बिल में ऐसा क्या है, जिसके पास होने पर देशवासी इसकी खुशियां मना रहें है। सरल शब्दांे में कहा जाये तो अब लगभग समस्त वस्तुओं एवं सेवाओं पर एक नया कर लगेगा और वह होगा वस्तु एवं सेवा कर साथ ही पहले जो भी कर लगते थे वे अब नहीं लगेगें।

 

वस्तु एवं सेवा कर पास होने के पूरे देश में एक ही दर पर कर लगेगा चूॅकि यह सम्पूर्ण देश पर लगेगा तथा इसके अलावा अन्य कोई कर नहीं देना पड़ेगा। सन् 2000 में वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में राज्य वित्त मंत्रियों की एम्पार्वउ कमेटी बनाई गई इस बिल के अन्तर्गत वस्तु एवं सेवा कर के दो भाग होगें।

     केन्द्र द्वारा लगाया जाने वाला केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर।

     राज्य द्वारा लगाया जाने वाला प्रान्तीय वस्तु एवं सेवा कर।

वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली की अध्यक्ष में जी.एस.टी. परिषद की पहली बैठक हुई थी जिसमें कई निर्णय लिए गए छूट सीमा 20 लाख तक कारोवार केन्द्र और राज्य सरकारों ने स्वेच्छा से सेवाओं पर वस्तु एवं सेवा कर में शामिल किया है।

 

भारत में लागू विभिन्न अप्रत्यक्ष करों को समायोजित कर एकीकृत कर प्रणाली वस्तु एवं सेवा कर को संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित कर दिया गया है और इसे 10वें संविधान अधिनियम के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

 

वस्तु एवं सेवा कर का प्रारूप या संरचना -

 

सामाजिक शोध:-

शोधकर्ताओं ने इस विषय पर एक खोजी शोध तकनीकी का प्रयोग किया है, सम्बन्धित पत्रिकाओं से पिछले साहित्य पर आधारित संरचनाओं से वार्षिक रिपोर्ट विस्तृत विवरणों से समाचार, पत्र, पत्रिकाओं से समंको का संकलन किया है।

 

भारत एक संघीय व्यवस्था वाला देश है तथा इसके प्रारूप या संरचना को ध्यान में रखते हुए वस्तु एवं सेवा कर के दो घटक होगें।

     केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर,

     राज्य वस्तु एवं सेवा कर

दोनों केन्द्र और राज्य सरकार एक साथ एक ही मूल्य के वस्तु माल की हर एक आपूर्ति पर कर लगाया गया है वस्तु एवं सेवा कर पर शैक्षणिक साहित्य के अनुसार अध्ययन के उद्देश्य के लिए अनुसंधान डिजाइन का उपयोग किया गया है। वस्तु एवं सेवा कर एक व्याख्यात्मक अनुसंधान होने के कारण यह पत्रिकाओं, लेख, पत्रों में प्रकाशित माध्यमिक आंकड़ो पर आधारित है। अध्ययन विषय को ध्यान में रखते हुए वर्णात्मक प्रकार के अनुसंधान को अपनाया गया है।

 

अध्ययन का उद्देश्य:-

1.     वस्तु एवं सेवा कर के मामले में अन्तर्निहित राय कर अध्ययन करने के लिए व्यापारियों एवं समाज तथा विनिर्माण क्षेत्र का अध्ययन करना।

2.     वस्तु एवं सेवा कर की चुनौतियों का अध्ययन करना तथा वस्तु एवं सेवा कर का परिचय।

3.     वस्तु एवं सेवा कर के कार्यान्वयन एवं सम्भावनाओं का अध्ययन करना।

4.     वस्तु एवं सेवा कर के परिणाम का अध्ययन करना।

5.     वस्तु एवं सेवा कर की सुविधाओं का अध्ययन करना।

6.     वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली के फायदे और चुनौतियों का मूल्यांकन करना।

7.     वस्तु एवं सेवा कर पर और अधिक शोध कार्य के लिए जानकारी उपलब्ध कराना।

 

परिकल्पना:-

1.     वस्तु एवं सेवा कर से भविष्य में क्या लाभ होगा।

2.     वस्तु एवं सेवा का लगाने से मुद्रा स्फीति बढ़ेगी या घटेगी।

3.     समस्त प्रकार के कर व्यवस्था को समाप्त करके सिर्फ एक देश एक ही कर व्यवस्था लागू करने के क्या फायदे होगें।

4.     कर संरचना में यह परिवर्तन श्रेष्ठ परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है इससे क्या बदलाव आयेगा।

 

प्रस्तावित मॉडल की मूक विशेषताः-

1. देश-सीजीएसटी और एसजीएसटी की संघीय संरचना के अनुरूप।

2. सीजीएसटी और एसजीएसटी केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार के खाते में अलग-अलग भुगतान किया जाना है।

3. सीजीएसटी और एसजीएसटी का अलग से इलाज किया जाना चाहिए, आमतौर पर सीजीएसटी के खिलाफ चुकाए गए करों को सीजीएसटी के लिए इनपुट कर क्रेडिट के रूप में लिया जाना चाहिए और एसजीएसटी के लिए एक ही सिद्धांत लागू होगा।

4. सीजीएसटी का प्रशासन राज्य के साथ केंद्र और एसजीएसटी होगा।

 

जीएसटी बनाम अन्य करों की दर:-

 

जीएसटी दर संरचना नीचे सारणीबद्ध हैः

 

जीएसटी में करों को कम किया जाएगाः जीएसटी विचार के लिए किए गए सामानों और सेवाओं के सभी लेनदेन पर विश्वास करेगा। विशेष रूप से, यह निम्नलिखित अप्रत्यक्ष करों को प्रतिस्थापित करेगा:-

 

 

केंद्रीय स्तर परः

1. केंद्रीय उत्पाद शुल्क (उत्पाद शुल्क के अतिरिक्त कर्तव्यों सहित)

2. सेवा कर

3. सीवीडी (उत्पाद शुल्क के बदले आयात पर लेवी)

4. एसएसीडी (वैट के बदले आयात पर लेवी)

5. केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी)

6. औषधीय और टॉयलेटरी की तैयारी पर लगाए गए उत्पाद शुल्क

7. इस तरह के चार्ज और क्यूस

 

राज्य स्तर पर:-

1. वैट/बिक्री कर

2. मनोरंजन कर (जब तक यह स्थानीय निकायों द्वारा लगाया जाता है)

3. लक्जरी कर

4. प्रवेश कर वबजतवप के बदले में नहीं है

5. क्यूस और अधिभार

 

प्रस्तुत शोध का औचित्य:-

वस्तु एवं सेवा कर की 18 प्रतिशत की भारी गढरी का बोक्ष या तो ग्राहक उठाये या व्यापारी वस्तु एवं सेवा कर को लेकर व्यापारी एवं आम जनता में असंतोष की स्थिति व्याप्त है जहां बहुत सी वस्तुओं पर कर की दर 4 प्रतिशत से 8 प्रतिशत थी उन्हीं वस्तुओं पर 18 प्रतिशत की कर दर आम जनता एवं व्यापारियों के लिए एक बड़े बोझ में समान है।

 

प्रस्तुत शोध का औचित्य इस बात पर प्रकाश डालना है कि क्या छोटे व्यापारियों एवं उपभोक्ता को इससे लाभ होगा या नहीं।

 

छोटे व्यापारियों को कम्प्यूटर आपरेटर तथा उनकी सैलरी इत्यादि की व्यवस्था करनी एक बड़ी जिम्मेदारी होगी साथ ही बाजार साख के आधार पर माल बेचने वाले छोटे व्यापारी वस्तु एवं सेवा कर भरने की निर्धारित समय सारणी पर अमल कर पायेंगे।

 

क्या सस्ता होगा:-

     इलेक्ट्रानिक वस्तुएं जैसे .सी. माइक्रोबेव, ओवेन, फ्रिज, वासिंग मशीन इत्यादि सस्ते दरों पर प्राप्त होगी क्योंकि वर्तमान में इन वस्तुओं पर 12.5 प्रतिशत सीमाशुल्क 14.5 प्रतिशत वैट लगाया जाता है। लेकिन वस्तु एवं सेवा कर के आने से एक ही प्रकार का कर लगेगा जिससे ये वस्तुएं सस्ती होगी।

     रेस्टोरेन्ट बिल यानी खाद्य पदर्थो में भी अलग-अलग प्रकार के कर लगाये जाते हैं। जिससे घर के बाहर होटल में खाना इत्यादि काफी महंगा हो जाता है। लेकिन वस्तु एवं सेवा कर के प्रावधान से खाद्यान से खाद्यान वस्तुएं सस्ती होंगी।

     मल्टीप्लेक्स एवं मीडिया में वर्तमान में 22 से 24 प्रतिशत कर लगाये जाते हैं, इसमें सेवा कर एवं मनोरंजन कर प्रमुख हैं। लेकिन वस्तु एवं सेवा कर लाने से कर की राशि 18 से 20 प्रतिशत हो जायेगी।

     दवाइयों में भी विभिन्न प्रकार के कर लगाये जाते हैं आॅललाईन हो या स्थानीय बाजार लेकिन वस्तु एवं सेवा कर में 6 प्रतिशत ही कर लगेगा।

     छोटी कारे भी सस्ती होंगी।

     वस्तु एवं सेवा कर के मूर्त रूप से लागू करने  से 18 से 20 प्रतिशत सीमेन्ट इत्यादि की कीमतें गिरेंगी।

 

क्या होगा मंहगा:-

     पैक्ड फूड 12 प्रतिशत तक महंगे होगें जिन्हें पैक्ड वस्तुओं में जोड़ा गया है वह है चाय, काॅकी इत्यादि क्योंकि वर्तमान में इन पदार्थो पर किसी प्रकार का कोई चार्ज नहीं लगता लेकिन वस्तु एवं सेवा कर के जुड़ने से सरकार कर की सामान्य दर लगायेगी जिससे इन वस्तुओं की कीमत बढ़ेगी।

     डायमंड ज्वेलरी रेडीमेड कपड़ा वस्तु एवं सेवा कर के लगाये जाने से मंहगे होगे क्योंकि इससे 12 प्रतिशत कर जोड़ा गया है।

     टैक्सटाइल्स, खाद्य तेल कम कीमत के फुटवेयर में कर दर बढ़ेगी।

     स्टैण्डर्ड वस्तु एवं सेवा कर 18 प्रतिशत वस्तुओं की कीमत दुगुना करेगी जिसका भुगतान अंतिम उपभोक्ता करेगा।

 

सरकार पूरी तरह से ये मान चुकी है। इसका लाभ आम जनता को अवश्यक मिलेगा। भारत एक संघीय देश है। जहाँ अप्रत्यक्ष कर संघीय और राज्य बर्धित कर लगाया जाता है। राज्य सरकारें द्वरा मूल्य तय करने का अधिकार है। वस्तु एवं सेवा कर सभी अप्रत्यक्ष करों में मील का पत्थर साबित होगा। 1 जुलाई 17 से लागू होने जा रही नई कर व्यवस्था वस्तु एवं सेवा शुल्क को ध्यान में रखते हुए व्यापारियों को नये तरीके का व्यापार तकनीक से अवगत कराया गया है।

 

वस्तु एवं सेवा कर के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण बाते:-

     वस्तु एवं सेवा कर एक अप्रत्यक्ष कर है। जो देश भर में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर विर्निमाता से उपभोक्ता तक एकल कर होगा जिससे पूरा देश एक एकीकृत साक्षा व्यापार में परिवर्तित हो गया है।

     उत्पादन के प्रत्येक चरण में भुगतान किए गए आगत करो एवं लाभ मूल्य संबंर्धन के बाद के चरण में उपलब्ध होगा इस प्रकार उत्पादन के प्रत्येक स्तर पर केवल ‘‘वैल्यू एडीशन’’ पर ही यह कर देना होगा।

     अन्तिम उपभोक्ताओं को इस आपूर्ति श्रृंखला में अंतिम डीलर द्वारा लगाया गया वस्तु एवं सेवा कर ही वहन करना पड़ेगा इस प्रकार विभिन्न स्तरों पर लगने वाले करों पर कर का प्रभाव समाप्त हो गया है।

     वस्तु सेवा कर के लागू होने से केन्द्रीय करों में से केन्द्रीय उत्पाद शुक्ल सेवा कर एडीशनल कस्टम डयूटी अतिरिक्त कस्टम डियुटी वस्तुओं एवं सेवाओं पर लगने वाले सारे सरचार्ज जहां समाप्त होगें वही राज्यों के करों में वैट मनोरंजन कर केन्द्रीय विक्री कर, चंूगी कर प्रवेश कर, खरीद कर, बिलासिता कर, लाटरी कर, सट्टे जंये पर लगने वाले कर समाप्त होगें।

     कुछ समय बाद वस्तुओं के मूल्य इससे कम होगें जिसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को होगा, सेवाओं के मूल्यों में कुछ वृद्धि इससे होगी।

     वस्तुओं सेवाओं की लागत कर होने से भारतीय निर्यात को इससे बढ़ावा मिलेगा।

     अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इससे जी.डी.पी. में वृद्धि होगी, नेशनल काउसिल आफ एप्लाइड इकोनामी रिसर्च (छब्।म्त्) ने इससे जी.डी.पी. में 09 प्रतिशत से 1.7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया था।

     वस्तु एवं सेवा कर की संरचना दोहरी किस्म की होगी केन्द्र सरकार द्वारा लगाया वसूला जाने वाला कर तथा राज्य सरकारों द्वारा लगाया वसूला जाने वाला कर।

     वस्तु एवं सेवा कर के मामले में विभिन्न निर्णयों के लिये वस्तु एवं सेवा कर परिषद का गठन किया गया है। जिससे केन्द्र राज्य दोनों का प्रतिनिधित्व होगा।

     केन्द्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली वस्तु एवं सेवा कर में सभी राज्य सरकारें सदस्य होंगी इस प्रकार यह शक्तिशाली संवैधानिक निकाय होगा।

     केन्द्र एवं राजय सरकार दोनों को ही वस्तु एवं सेवा कर के सम्बन्ध में कानून बनाने का अधिकार होगा।

     वैयक्तिक उपभोग वाली वस्तु अर्थात् राशन को वस्तु एवं सेवा कर के दायरे से बाहर रखा गया है।

 

वस्तु एवं सेवा कर भारत के कर ढंाचे में सुधार का एक बहुत बड़ा कदम है, वस्तु एवं सेवा कर एक अप्रत्यक्ष कर कानून है, वस्तु एवं सेवा कर एक एकीकृत कर है। जो वस्तुओं और सेवाओं दोनों पर लगेगा।

 

वस्तु एवं सेवा कर लागू होने से पूरा देश एकीकृत बाजार में तब्दील हो गया है और ज्यादातर अप्रत्यक्ष कर जैसे केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर, वैट इत्यादि इसी में समाहित हो जायेगे। इससे पूरे भारत में एक ही प्रकार का अप्रत्यक्ष कर लगेगा।

 

18 फीसदी वस्तुओं की कीमतों पर 18 फीसदी तक कर लगेगा रोजमर्रा की उपयोगी वस्तुएं जैसे कोशतेल, साबुन, टूथपेस्ट, गेहूँ, चावल, मिठाई, चीनी, खाद्यतेल वगैरह सस्ते हो जायेगें।

 

समस्या एवं सुझाव:-

     इतने कड़े कानून के चलते व्यापारियों को भारी नुकशान की आशंका बनी हुई है।

     इसके प्रत्यक्ष लाभों से कोई अवगत नहीं है।

     इसका भविष्य क्या है, यह भी अभी चर्चा की विषय बना हुआ है।

     वस्तु एवं सेवा कर कर के आधार को और विस्तृत करेगा तथा करों के अनुपात में आवश्यक सुधार करेगा और राज्यों के बीच जो प्रतिस्पर्धा बनी है उसे समाप्त कर देगा।

     यह सभी राज्यों में समान रूप से कर के बीच को पुर्नवितरित करेगा।

     यह सभी राज्यों में कर प्रणाली में एक रूपता निश्चित् करेगा।

     यह आर्थिक लेन-देन में सुधार करेगा।

     इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और दोहरे कराधात समाप्त होगें।

     करदाताओं को शिक्षा एवं जनसंचार के माध्यम से जागरूक करने की आवश्यकता है।

     वस्तु एवं सेवा कर पर विभिन्न कार्य शालाएं, प्रशिक्षण और सेमीनार द्वारा जागरूकता लाया जा सकता है।

 

निष्कर्षः -

जीएसटी भारतीय कराधान में सुधार है। हम कह सकते हैं कि जीएसटी के कार्यान्वयन के बाद, उपभोक्ता और व्यवसायों पर कर का बोझ कम हो जाएगा और इस मॉडल के तहत अतिरिक्त करों की संख्या शामिल की जाएगी। जीएसटी कराधान में पारदर्शिता में सुधार करने और निवेशकों और सरकारी नीतियों के कार्यान्वयन के लिए एक स्वस्थ वातावरण बनाने में मदद करता है। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि देश में पहलुओं की संख्या के आधार पर है, लेकिन कराधान मुख्य भाग है क्योंकि यह देश के लिए राजस्व मॉडल के रूप में काम करता है और हर देश के लिए आवश्यक है।राष्ट्र के विकास और दोहरे कर के बोझसे बचने के लिए कर प्रणाली को अद्यतन करने की जरूरत है, जीएसटी एक मजबूत भूमिका निभाता है। कार्यान्वयन से पहले जीएसटी सरकार को व्यवसाय और ग्राहकों के दृष्टिकोण के साथ देश अर्थव्यवस्था विकास से संबंधित सभी पहलुओं का अध्ययन करने की आवश्यकता है। भारत के इतिहास में कर संरचना में ये पहला बदलाव नहीं है इससे बहुत सी वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतें गिरेगी। हांलाकि इससे मुद्रा स्फीति बढ़ेगी और मौद्रिक परिवर्तन होगा लेकिन बहरहाल कर संरचना में यह परिवर्तन एक श्रेष्ठ परिवर्तन है।

 

भारतीय कर क्षेत्र में इसे बहुत बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हालाकि अन्य विकासशील देशों में वस्तु एवं सेवा कर लागू करने से जीडीपी में भारी गिरावट आई है। देखना यह है कि आने वाले समय में भारत में इसके क्या परिणाम होते है। चूंकि राजस्व प्राप्तियों में सर्वाधिक योगदान करो का ही होता है। समस्त प्रकार की कर व्यवस्था को समाप्त करके सिर्फ एक देश एक ही कर व्यवस्था लागू करने से क्या फायदें है यह आने वाले समय में ही पता चलेगा।

 

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Received on 07.09.2018                Modified on 12.09.2018

Accepted on 26.09.2018            © A&V Publications All right reserved

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